Barish Shayari : बारिश का मौसम सबको बेहद पसंद होता है आमतौर पर ये मौसम जुलाई से लेकर अक्टूबर तक होता है.पेड़ पौधौं में हरयाली आ जाती है, सारा वातावरण आकर्षक हो जाता है. बारिश के इस मौसम में गरमा गरम चाय और पकोड़ों का अपना ही एक अलग आनंद होता है.
ऐसे मौसम में दोस्तों की महफ़िल में बारिश पर कुछ शायरी सुनने सुनाने का दिल करता है. आप सभी के लिए ऐसे ही कुछ चुनिंदा शायरियों का अनूठा संग्रह प्रस्तुत है,
जिसे आप अपने दोस्तों के साथ शेयर कर सकते हैं.
Barish Shayari In Hindi
सुना है बारिशों में हर दुआ क़बूल होती है
अगर हो इज़ाज़त तो मांग लूँ आपको
हवा भी रुक सी जाती है गाने को कुछ तराने
बारिश की बूंदे भी उसे छूने को करती है बहाने

पूछते थे न कितना चाहते हैं हम तुम्हे
लो अब गिन लो बारिश की ये बूंदे
कितना कुछ धुल गया आज इस बारिश में
हाँ आपकी यादों के पन्ने भी धुल गए इस बारिश में

बाहर आकर देखिए बारिश का नजारा
हवा है ठंडी और मौसम भी है प्यारा
मेरी हर एक दुआ में तेरा ही नाम है,
और हर एक बारिश में तेरा ही पैगाम है

सुन ए बारिश,ज़रा थम के बरस
जब वो आ जाये तो जम के बरस
पहले न बरस की वो आ ना सके
फिर इतना बरस की वो जा ना सके
तू भीगे तो जैसे बारिश सज जाए,
और मेरा ये दिल तुझ में ही खो जाए

पूछते थे न कितना चाहते हैं हम तुम्हे
लो अब गिन लो बारिश की ये बूंदे
बारिशों की भी अपनी कहानी है,
जैसे अश्कों के साथ बहता पानी है

कुछ तो चाहत होगी इन बूंदो की भी
वरना कौन छूता है
इस ज़मीन को उस आसमाँ से टूट कर
मुझे ऐसा ही ज़िन्दगी का एक पल चाहिए,
प्यार से भरी बारिश होऔर संग तू चाहिए

बरसात का मौसम दिल को भा जाता है
तेरा ख्याल हर बूँद में आ जाता है
ग़म-ए-बारिश इसीलिए नहीं कि तुम चले गए,
बल्कि इसलिए कि हम अपने आप को भूल गए

मुझे ऐसा ही ज़िन्दगी का एक पल चाहिए,
प्यार से भरी बारिश होऔर संग तू चाहिए
जो वो बरसा तो इश्क़ है,
और मैं बरसा तो बस अश्क होगा

हम भीगते हैं जिस तरह से तेरी यादों में डूबकर
इस बारिश में कहाँ वो कशिश तेरे ख्यालों जैसी
रहने दो अब,के तुम भी मुझे पढ़ न सकोगे
बरसात में काग़ज़ की तरह भीग गया हूँ मैं

बारिश की हर एक बूँद में तेरा ही नाम है
तू साथ है इसलिए तो ये बारिश खास है
ये बारिश भी बिल्कुल आपके जैसी है,
फर्क सिर्फ इतना है,
आप मन को भिगा देते हो,
वो पूरे तन को भिगा देती है

अपने आप को इतना भी मत बचाया करो
बारिश जब हो जाये तो भीग जाया करो
बरसात का बादल तो दीवाना है वो क्या जाने
किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है

इस बारिश के मौसम में अजीब सी कशिश है
ना चाहते हुए भी कोई शिद्दत से याद आता है
मासूम मोहब्बत का बस इतना सा फ़साना है
कागज़ की कश्ती और बारिश सा ज़माना है

वो मेरे रुबरु आये भी तो बरसात के मौसम में
हमारे आँसू बह रहे थे और वो बरसात समझ बैठे
कोई तो बारिश ऐसी हो जो तेरे साथ बरसे,
तन्हा तो मेरी आंख हर रोज बरसाती है

गुनगुनाती हुई आती है फ़लक से बूँदे
कोई बदली तेरे पाजेब से टकराई है
जो इस बरसात में तेरा साथ मिल जाए,
तो हर मौसम अपना सा लगने लगे

तेरे इश्क़ की बारिश हो,
मैं जलमगन हो जाऊं,
तुम घटा बन कर चलेआओ,
मैं बादल बन जाऊं
मजबूरियाँ ओढ़ के निकलता हूँ
घर से आजकल,
वरना शौक तो आज भी है
बारिश में भीगने का

तेरे इश्क़ की बारिश में कुछ इस
कदर भीग जाऊं,
हो के मस्त मौला मैं इस दुनिया
को भूल जाऊं
खुद भी रोता है और मुझे भी
रुला के जाता है,
ये बारिश का मौसम उसकी
याद दिला के जाता है
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खुश नसीब होते हैं बादल,
जो दूर रहकर भी
ज़मीन पर बरसते हैं,
और एक बदनसीब हम हैं,
जो एक ही दुनिया में रहकर भी
मिलने को तरसते हैं..!!
दिल की बातें कौन जानें,
मेरे हालात को कौन जानें,
बस बारिश का मौसम है,
मेरी प्यास का
एहसास कौन जानें..!!
वाह मौसम आज तेरी अदा पर,
दिल खुश हो गया, याद मुझको
वो आई और बरस तू गया..!!
बारिश और मोहब्बत दोनों ही
यादगार होते हैं,
बारिश में जिस्म भीगता है
और मोहब्बत में आँखें..!!
सुना है बाजार में गिर गए हैं दाम इत्र के
बरसात की पहली बूंदों ने
आज मिटटी को जो छुआ है
पहले बारिश होती थी तो याद आते थे
अब याद आते हो तो बारिश होती है
कितना अधूरा लगता है ना,
जब बादल हो पर बरसात ना हो,
जब जिंदगी हो पर प्यार ना हो,
जब आँखे हो पर ख्वाब ना हो,
और जब कोई अपना तो हो
पर वो साथ ना हो..!!
कुछ नशा तेरी बात का है,
कुछ नशा धीमी बरसात का है,
हमे तुम यूँ ही पागल मत समझो,
यह दिल पर असर
पहली मुलाकात का है..!!
मौसम-ए-इश्क़ है तू एक कहानी बन के आ
मेरे रूह को भिगो दें जो तू वो पानी बन के आ
हर दफ़ा बारिश उसका
पैग़ाम लेकर आती है,
और मेरे बंजर से दिल को,
हरा भरा कर जाती है..!!
ख़यालों में वही ख्वाबों में भी वही
मगर उनकी यादों में हम थे ही नहीं
हम जागते रहे दुनिया सोती रही
एक बारिश ही तो थी जो हमारे साथ रोती रही
बारिश की बूंदों सा ये
दिल गिरता बरसता है,
तुम पास होते हो मगर फिर
भी तरसता रहता है..!!
ज़रा ठहरो ये बारिश थम जाये तो फिर चले जाना
किसी का तुझे यूँ छू लेना मुझे अच्छा नहीं लगता
आ जाओ तुम भी कभी यूँ इस सुहानी बरसात में
जैसे दिलकश ख्वाब कोई आता है हसीं रात में
तुझ में और बारिश में एक
खास बात है,
दोनों ही कभी-कभी बेवजह
ज़ोर से बरसते हैं..!!
बारिश से मोहब्बत मुझे
कुछ इस क़दर है,
वो बरसता उधर है,
और मेरा दिल धड़कता इधर है.
मासूम मोहब्बत का बस इतना सा फ़साना है
कागज़ की कश्ती और बारिश सा ज़माना है
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